मैने तथा मेरी धर्मपत्नी ने २३ जनवरी २००२ को गोंदिया (महा.) में पूज्य सदगुरुदेव से मंत्रदीक्षा ली।
दीक्षा लेने के पूर्व मेरे स्वभाव एवं व्यवहार में चिडचिड़ापन था एवं मानसिक रूप से भी मैं काफी तनाव में रहता था, परंतु दीक्षा लेने के उपरान्त नियम का पालन करते हुए जप करने से मुझे जो शान्ति, प्रसन्नता, सूझबूझ व सफ़लता मिलती हए, उसका मैं बयान नहीं कर सकता। मेरे काफी अवगुण दूर हो गये हैं। जब भी मुझे कोई परशानी महसूस होती है तो मैं अपने गुरुमन्त्र का स्मरण करके रात्री में सो जाता हूँ, उस रात स्वप्न में पूज्य गुरुदेव अवश्य ही दर्शन देते हैं। वही मुस्कुराता, शांत-सौंम्य चेहरा नजर आता है और मेरी परेशानी का भी निदान हो जाता है।
मेरी धर्मपत्नी के व्यवहार में भी काफी परिवर्तन आया है।’सदगुरुदेव का आशीर्वाद सदा हमारे साथ है’ यही सोचकर हम रोज अपनी प्रतिदिन की दिनचर्या प्रारंभ करते हैं, जिससे हमें अपने कार्यों में सफ़लता एवं संतोष भी मिलता है।
रविकर्ण सिहं
(जबलपुर)
Thursday, October 4, 2007
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